यदि सरकारी बैंक सुरक्शित नहीं है तो प्राईवेट का तो किसी भी प्रकार व एक प्रतिशत भी विश्वास किसी भी किम्मत पर विश्वास नहीं करना चाहिये। सारी सुरक्सा तो सरकार द्वारा वित्तिय मामलों में दी जाती है।सरकारी बैंक दिवालिया नहीं होता है ।यदि यह नौबत आता है तो सरकार जानबुझ कर बैंक को दिवालिया कर देती है ।
सरकारी बैंक से लोन लेकर लोग प्राईवेट बैंक खोल लेते हैं तथा लोगों को बहकाते फिरते हैं। ताकि उनके बैंक में लोग रूपये डाले व वे रूपये लेकर भाग जाये। और होता भी ज्यादातर ऐसा ही। लोग प्राईवेट बैंक वालों के चक्रव्ययु में फंस कर ,अपनी बेसकिमती कमाई प्राईवेट कम्पनियों व बैंक वाले लूट ले जाते है। बाद में ,लोग पुलिस को रिपोरट करते घूमते हैं। हर रोज सैकड़ों घटनायें अखबारों छपी मिलती है।
पता नी क्यों लोग जान बूझकर लोगों के छूठे हथकंडों में आ जाते है। जब तक सरकार रहेगी तब तक सरकारी बैंक भी रहेगें। जिस दिन सरकार खत्म हो गई उस दिन सरकारी बैंक समाप्त हो जायेगें। तथा ब्रिटिस कम्पनी राज की तरह, कम्पनियों की गुलामी का राज पुनः आ जायेगा।
हां, यह नौबत भारत जैसे देश के बेवकूफ लोग ला शीघ्रता से सकते हैं। क्योंकि भारत के बैंक कर्मचारी व अधिकारी जो आजकल भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, वे काम नहीं करते है तथा लोन देकर वसूल नहीं करते हैं व बैंक से वि़ आर एस ले कर , प्राईवेट बैंक में अधिक सेलरी पर नौकरी कर लेते हैं।अतः सरकार को सरकारी बैंक दूसरे बैंकों में मिला देते हैं। फिर लोग अपने किये करमों का दंड भोगते हैं।सरकार द्वारा दिये जाने वाले बैंक से बहुत कम रूपयों पर नौकरी करते हैं।
