देश का इस से बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा जहां के मंत्री को यह पता नहीं कि राजनीति कहां करनी चाहिये। देश की अर्थ व्यवस्था के लिये सवाल राजनीति में नहीं उठायेगें तो कहां उठायेगें। राजनीतिक मंच पर देश की अर्थ व्यवस्था पर सवाल देश के वित्त मंत्री या अन्य मंत्री से सवाल करने पर , मंत्री कहता है कि राजनीति न करिये।तो मंत्री यह तो बताये कि वे करेगें क्या संसद में बैठकर ।
ऐसे नेता व मंत्री देश न बनाये जिसे यह भी पता नहीं कि संसद व राजनीति में होता क्या है तथा राजनीति का मतलब तक पता नहीं । राजनीति का मतलब लोगों में फूट डाल कर ,सिर फूड़वाकर संसद भवन में बैठकर आने को राजनीति नहीं कहते है। संसद भवन में बैठकर एक दूसरे पर लांछन लगाने का नाम संसद भवन नहीं है।।
संसद भवन का अर्थ है देश व समाज में फैली बुराईयों को जलाने के लिये सामूहिक एक मत से बुराईयों का सर्वनाश करने के लिये सूर्य के समान आग मय हो कर भस्म करना होता है।। सारे के सारे एम पी आग का गोला रहने चाहिये ,पांच बर्ष तक या तब तक एम पी रहते है। जो देश की बुराईयों को समाप्त न करने के लिये एम पी बनते है वे सड़ी मौत मरते है यह सब संसद सदस्य शुरू से देख रहे हैं। क्या -क्या बुरा हरस होता है।
अतः वही नेता बने जो देश के लिये करना चाहता है अपने लिये करने वाले का परिणाम अच्छा नहीं होता है। इसकी दुहाई नेता जनता को देता है। जनता नेता को ,जनता की दुहाई के कोप को नेता का शरीर सहन नहीं कर पाता है। तथा जान तक अन्याय के कारण दे बैठता है।
अभी तक भारत में शत प्रतिशत नेता लोग बेवकूफ है। वे यह नहीं जानते है कि जब चुनाव जीत जाता है तो वह उसको मिले वोटों की संख्या तक के लोगों का नेता नहीं है।जैसा कि भारत का हर नेता समझता है।चुनाव जीतने के बाद वह अपने ही नहीं दूसरे देशों की जनता का नेता भी होता है। सारे विश्व की जनता के साथ न्याय नहीं कर सकते है तो मृत्यु दण्ड सर्वभौम सत्ता द्वारा दिया जाता है जैसे कि सुस्मा शवराज व अरूण जेतली और अन्य के असमयिक निधन हुये।
किड़े- मकोड़ों तक के दण्ड संसद सदस्य को भोगने पड़ते है। अतः राजनेता सोच समझ कर बने, ऱूपये हडपने के लालच में राजनेता न बने।रूपयों के लालच में कुचिये की जाती में जन्म होता है।राजा रैयत का नाम तो हरियाणा का लोगों ने सुना होगा।।किसी राजनेता को पता नहीं हो तो पता कर लेना ,उनका काम धन्धा व जीवन शैली कैसी होती है।आजकल इस युग में क्या है।
कृष्ण भगवान १६००० रानियों को छोड़ अन्याय के कारण मौत की नींद सौ गये तथा उनके शरीर रूपी पत्थरों की कालिख सारी दुनिया देख रही है एक चोर और छलिये का क्या हसर होता है।राजा दशरथ तीन रानियों को छोड़ एक न के बराबर अपराध के दण्ड रूप मौत की नींद सो गया। रावण भी अपनी प्रजा की बद दुआऔ के कारण मौत की नींद सो गया। गिनती एक दो नहीं ,किताबो व ग्रंथो में जगह नहीं मिलती नाम लिखने को।
अतः इतिहास पढ़ कर समझ लेने में भलाई है झूठे वायदे न करे।
