देश वासियों को दिल्ली छोड़ ने वालों को कहीं पर तथा किसी भी किमत पर जमीन नहीं देनी चाहिये।लोग रूपयों के लालच में अपनी जमीन खानाबदोश लोगों को दे देते हैं तथा खाना बदोश दो चार साल उस जगह पर रहेगें , गन्दगी फैला कर दूसरे स्थान पर गन्दगी फैला ने चल देते हैं।
भारत में खानाबदोशों की संख्या बहुत ही ज्यादा। हर कोई ,हर रोज एक नया व गन्दगी का ढेर ( शहर) बसाने चल पड़ता है। कुछ ही समय में वह जगह कुड़े करकट का ढेर बना कर, दूसरी जगह के लोगों को बेवकूफ बनाने चल पड़ते हैं। तथा जिसने भी उनको जमीन दी वे भूखे व सड़ रहे हैं।
इसमें राजनेता, व्यपारी , सरकारी अधिकारी , कर्मचारी व मजदूर लोगों का सबसे बड़ा योगदान है। हर राजनेता , सरकारी कर्मचारी व्यपारी हर शहर में अपनें घर रखने की फिराक में रहता है। किराये की फिराक में मजदूरों को बरगलाकर शहर के कूड़ादान में ले जाकर फैंक देता है। किसी भी राजनेता , व्यपारी व मजदूर के गांव देख लो। कितनी गन्दगी फैला कर ,तीनों ही दूसरी जगह पर गन्द फैलाने चले गये है।गन्दगी फैलाने की होड़ में सरकार व व्यपारी हर रोज नई नई कलोनी व सैकटर काटते फिरते है । आज तक का रिकार्ड है लोग सरकार की तहसील में जाकर ,जैक कर सकते हैकि इन लोगों ने खेती वाली जगह छोड़ कर कहीं भी शहर व गाम बसाये हो।
आने वाले कुछ दिनों में खेती वाली जमीन तो जापान की तरह बचेगी नहीं,क्योंकि उनमें भी शहर बसाने का बहुत बड़ा हुनर है। आजकल वहां पर खेती गमलों में व घर की छत पर ही होती है बाकि जमीन शहर व शहर की गन्दगी ने खा ली।बस कुछ ही वर्षों का इन्तजार कर देखते रहो, तुम्हारी हालात जापान से कम बदतर होने वाली नहीं
हैं ।
