आप को जान कर दुःख तो नहीं होगा , परन्तु स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही का दण्ड भयंकर तरीके से भुगतना पड़ रहा है। वह आप के किरयाकलापो का तोहफा है ।जिसका आपको संज्ञान नहीं है कि जो आप आज कर रहे हैं वह आने वाले कुछ दिनों में आपको व आप के परिवार के सदस्यों के लिए जान लेवा साबित हो सकता है। तथा इलाज पर लाखों खर्च करने पर भी इलाज संभव नहीं है।
गांव के गन्दे पानी के स्रोत का खेती-बाड़ी में उपयोग करना महाभयकर रूप से जहरीला होता है। इससे पैदा हुए अनाज गुणवत्ता की बजाय लोगों व पशुओं के वेस्ट मिश्रित जल से शरीर के अंदरूनी हिस्सों को गला देता है। रिकवरी रेट यदि टेस्ट किया जाये तो माइनस ही मिलेगी। पशुओं व लोगों में इसके कारण घातक रोग हो रहे हैं वह लाखों लोग व पशु प्रति दिन मौत की नींद सो रहे हैं।
पहले लोग इस गन्दे पानी का उपयोग ईटं निकालने में किया जाता था साथ में जोहड़ गन्दी मिट्टी की ईंट निकाल ली जाती थी। सारी गन्दगी आग में जल जाती थी। आजकल सरकार ने गन्दगी पालने वाले कार्यक्रमों को बहुत बढ़ावा दिया हुआ है, जैसे मछली पालन, मछली गंदे पानी में पैदा होती है जिसका लोग खाने में उपयोग करते हैं तथा लयूकोडरमा जैसे लोगों की कारक है।
सरकार को जोहड़ के पानी को खेती उपयोग प्रतिबंध लगा देना चाहिए ताकि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके। उस पानी व मिट्टी को पंचायत निलाम कर ,उससे उत्पन्न आय से जोहड़ो के रख रखाव में उपयोग किया जा सकता है।
