सरकारी कर्मचारियों को छुठ बोलने की इस तरह की पक्की पकड़ बना रखाीहै कि व सच्चाई से कोसों मिल दूर की बातें करते हैं।उन से छुठ कितनी ही अच्छी परह से बुलवाले ,छुठ बोलने में ,इनाम के हकदार तक बन गये है।इतना बड़ा सफेद छुठ बोल देते है कि सच्चाई की कोई अहमियत ही नहीं रहती कि सच्चाई भी कुछ होती है, सुनकर शर्म के मारे ,दौबारा एेसे लोगों के पास भी फटकने का दिन नहीं चाहेगा। पूरी पृथ्वी पर ३/४ हिस्सों में पानी भरा सड़ रहा है ,तुफानी वर्षा व बाढ़ ने चारो ओर तबाही का मन्जर तमाशा बनाते खड़ा है।सरकारी साहब पानी की कमी को लेते रहते है यदि उनके दफ्तरमें झाँक कर देखा जाये तो , वहाँ पर भी बाढ़ जैसे हालात मिलेगें, परन्तु बाहर जा कर अनाप- समान बोल देते हैं। उसे पता नहीं हो हो ता है कि सरकारी साहब की जुबान का क्या मतलब होता है।इन्हीं गलत बोलों के कारण बाढ़ें आती हैं।राज योग के शब्दों का गलत प्रयोग दुखदायी हो ता है।
आप कहीं भी चले जाइये, आप को , गलियों व राहों से सा फ बचकर नहीं निकल सकते है हर गली व राह गंगा , यमुना व सरस्वती बना बहती है। हर गाँव में ७_९० जोहड़ पानी से ,इस तरह से मिलेगेंकि उनका जल वापिस गलियों को बिना सरकारी मदद के सदियों बदलता हुआ मिलेगा। पिने के सा फ पानी के से हालात है कि वह सरकारी टाइम-टेबल के बिना ही , अपने आप नहरों के रूप में गलियों की शोभा बढ़ाता हुआ मिलेगा।हर किसी को उनके द्वारा फैलाई गन्दगी को उनके घरों में , उनके जूतों की काँती बढ़ाकर ले जाता मिलेगा। फिर भी हर फाइल व जुबान कहती मिलेगी, पानी कहाँ है,हम तो उसके बाहर मर रहे है।
खेतों की बात करें तो , पानी के वरदान का नजारा ,हर हस्पताल में लोगों की भीड़ देखकर पता चल जायेगा।कि मलेरिया ।फाइलेरिया व डेंगू के मरीजों की संख्या कितनी है।,जहाँ धान की फसल लगा दी है वहाँ नहरी व जमीनी पानी की कमी नहीं हो सकती है,यदि कोई पानी की कमी बता रहा तो , सफेद छुठ बोल रहा है। आज से कोई बीस- पच्चीस साल पहले की पुछे तो पानी का भूस्तर ९५० फुट नीचे था जो अब ४०-४५ फुट के लेवल पर आ गया तो ये पूछों उनसे की ,कोन से स्कुल में पढ़ कर आये हो। पुरी पृथ्वी जल स्माधी लेने को हैं और हरियाणा के लोगों बड़ी से बड़ी झुठ के रिकार्ड कायम कर रहे है।
पानी ने तो पहाड़ों तक को नहीं बक्शा है , वहाँ सर्दी व गर्मी दो में के रितुओं में ही नहीं छोड़ा है। जाड़ों में जमें पानी का कहर तथा गर्मी में बरसात का कहर। अब बताओ पानी की कमी कहाँ। पानी की कमी हो गी,वहाँ दो चिजें मिलेंगीं।
१ चमड़ी के रोग देखने को नहीं मिलेगें।२. वहाँ पर मलेरिया जैसी जाने लेना बिमारियां नहीं के बराबर मिलेगी।
पिने के साफ पानी की हालात ऐसी है बैचारा की ,भैसें व कुत्ते नहलाये जा रहे है। ऐ, छुठ बोलने वालों , बताओ तुम्हारी साथी कौन बने। छुठ से फैले रोगों का कोई इलाज़ नहीं है।
