यह धार्मिक पंथी ताकतों व बवालियों की भावनाओंके साथ छेड़ छाड़ का मामला नहीं है।जो जगह राम और दशरथ की हैं युगों से तब उस पर किसी का कब्जा कैसे हो सकता है , क्यों कि राम और दशरथ दो में ही विश्व विजेता थे।उनकी भी ना पर कैसे अतिकरमण हो सकता है, यह सब बेकार व भिखारी लोगों का दुनियाँ की आँखें में धूल झोकनें के सिवाय कुछ भी नहीं है । धर्मांध लोगों को भड़का कर ,उन्हें को मौत के हवाले कर दिया जाता है। तथा भिखारी उन मन्दिरों में बैठे कर जन भावनाओं के साथ खि लवाड़ करते है।यदि गट्टर के वाले को सा फ करना है तो किसी के पुछने की जरूरत कैसे आन पड़ी ।क्योंकि गन्दा वाले की बदबु व कजरा तो आसपास रहने वाले को बिमारी व मौत की शौगात लाता है। अतः इसे जितना जलदी हो सके सा फ कर तक देना चाहिय़े। राम व दशरथ तो अब ढुढे़ भी नहीं मिलेगें।अदालतों के फसलें तो युगों तक नहीं आते है वहाँ पर तो तारिखों पर तारिखों रख कर कैसे तमाये जाते है , दुनिया ऐसे ही मरती रहती के सिध्दांत पर काम करती नजर आती है। दूसरा अदालतों का कहा मानता कौन है फैसला आने पहले स्थगन आदेश का पालन करने का हूकम जा की हो जाता है।राम तेरे देश में जब तेरे माता -पिता ही तेरे नहीं हुये तो औरों से अपना होने की उम्मीद न कर । भारत अन्याय की भूमी थी व लगती है रहेगी भी। जब निर्दोष को बनवास हो सकता है वहाँ न्याय की राहें देखना ,अपने को राम की भाँती दण्डित करना है।
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