यह तथ्यों पर तोला जाये तो सब का एक ही जवाब होगा कि जब दिन की गर्मी के कारण पानी गर्मी हो कर ,उपर वाष्प के रूप में चला जाता है फिर वातावरण के बदलाव व तापमान में गिरावट के कारण वाष्प ठण्डी हो कर ,जब भारयुक्त हो जाती है तब वर्षा हो ती है। लेकिन यह सही कारण नहीं है।यदि एेसा हो ता तो हर रोज वर्षा होती। क्यों कि सूर्य की गर्मी तो हररोज बढ़ती है घटती नहीं है।दूसरी बात यह कि बादल वही एक जगह पर बरसता है व दुसरी जगह पर बिना बरसे गुजर कर कर तीसरे स्थान पर पानी फैंक देते हैं।जबकि तीनों स्थानों का तापमान समान हो ता है। वर्षा हो ने का कारण पौराणिक है। इन्द्र नाम का एक आदमी था जो पानी का रखरखाव करता था।आजकल उसे लोग इन्द्र देवता कहते है परन्तु उसके पास तापमान नहीं हो ता है।
एक समय मनु के पुत्र की मृत्यु हो गयी,उसके अन्तिम संस्कार के लिए शुध्द जल की आवश्कता थी । मनु का दूसरा पुत्र जल लेने इन्द्र के पास गया।इन्द्र हंकारी था , उसने कहा कि तुम कल फिर आऔगे,अत: तुम सब भाइयों का हिस्सा ले जाओ और अपनी जलांजली से सात दिन तक जल निचे फैंक दिया।जिससे जल प्रलय हो गयी।मनु पुत्र ब्याहा हुआ था तथा उसे वर कहते हैं इसी कारण इस जल का नाम वर्षा कहा जाने लगा। वर्षा का जल मृत्यु आत्माओं की तृप्ती व अगले जन्म के लिए दान किया जाता है क्यों कि वर्षा का जल पता हुआ व शुद्ध हो ता है।आजकल वर्षा इन्द्र के कोप के कारण होती है,इसका सही जवाब है । कोई भी गन्दी वस्तु नहीं लेती है।भूमी पर जो जल व्यापत है गन्दा ही है।अत: काले बादलों के जल को इन्द्र वापिस नहीं लेता है तथा उस जल को वापिस दण्ड स्वरूप जमीन पर डाल देता है,जिसके फल स्वरूप बाढ़ जैसी आपदायें आती है।इन्द्र देव केवल शुद्ध सफेद बादलों का जल ग्रहण करता है इस लिये सफेद बादल नहीं बरसते हैं। सफेद बादलों से कभी -कभी कुछ बुन्दे गिरती है,वही बुंदें आपक़े हिस्सों का शुद्ध जल है जो आपक़े पितरो द्वारा आपको दिया जाता है।जो प्राण वायु हवा में विचरण करती है,वही जल लाती व ले जाती है। वह समय ८४ लाख योनियों का श्राध्द समय हो ता है। जो अलग – अल़ग स्थानों व समय पर हो ता है। अतः हर स्थान पर एक समय पर वर्षा नहीं हो ती है।
