मैं ने था कि राजे राजमहलों में कहते है ,राजाओं के घर बहुत बड़े होते है। कइयों के तो कई कई गाँवों के समान एक राजा का महल होता है,परन्तु हम जिसका राज में रह रहे हैं ,उस में तो राजा नाम की कोई वस्तु तक नहीं दिखाई देती। किसी ने आजकल राजा की जगह अम अल ए तथा अम पी ने ले ली है।मैंने ,पूछा कि ने राज कहा करते है, वह मेरा अपमान करने वाले लहजे में ,बस कि ने इतनी भी पता नहीं, तु कहाँ का आदमी है।शर्मिन्दगी के अहसाहन तले दबा, मैं कुछ नहीं बोला।चेतन मन जागिरत हो ने पर,फिर पूछा कि ने कहते कहाँ पर है ,सब राजधानी में कहते है ,अच्छा बहुत अच्छा बात हो गयी ,मैले कुचले लोग भी राजधानी में रहने लग गये।मैने फीर पूछा ,”करते क्या है तड़ाक से बोला , लोगो के लिए कानुन व नियम बनाते है तथा उनकी पालन करवाते है।” अच्छा ये बता कि ने कानुन का पालन कभी किया है ,बोला मेरा क्या , मैं कानुन का पालन नहीं करता,फिर वे कानुन बनाते ही क्यों है। वह हमारे हर दिलाने के लिए नियम बनाते है,,।तु पालन भी नहीं कर का और नियम,कानून तेरे लिए।बोला, इस देश में ऐसा हो ता है हर सरकार में,।चल, यह तो बता ने वह राजधानी है कड़ै,कदै कदै हम भी घुम आया करेगें।दिल्ली री देश की राजधानी।आर म्हारे हरियाणा की चण्डीगढ़।मैं बोला तेरे ग्यान की तो दाद देना पड़ेगी।और यह बता तु पढ कितना रहा है ,फिर तड़ाक से जवाब म़ ए पास लु फस्ट डिविजन ।सरकार ने तेरे को नौकरी क्यों नहीं दी। सब बेईमानी व भर्ष्ट बैठे है।ना, कुछ न कुछ तेरे में कमी हो गयी ।सारे ,बैईमान व भर्ष्ट नहीं होते।मैं हट्टा हट्टा नौजवान तेरे को दिखाई नहीं देती क्या?तु तो मेरे भाई ,इन्टरव्यू और ईम्तिहान गलत दे आया । वह कैसे , हरियाणा की तो राजधानी आज बना ही नहीं है तथा न हरियाणा में राज है , भारत के २९ राज्यों में , हरियाणा के छोड़कर सभी की अलग अलग राजधानी है चाहे ,वह दो चार साल पहले ही क्यों न बना हो।तथा राजधानी के बिना राज राजे भी नहीं हो ता है।सब अपने घर की राहें ढूढते है , हरियाणा की राजधानी की राहें कोई नहीं ढूढ़ता।हरियाणे का राज सही करना है तो अलग हरियाणा अस्तितव में लाना हो गा। पाण्ुओं तथा चन्दरवन्शियों की राजधानी में विष्णुहरिवन्शियों की राजधानी नहीं हो सकती, सरकार के लिए ये शुभ संकेत नहीं है।
केन्द्र व राज्य सरकार के हित में लेख।
