करोना का कहर

करोना के डर तो न मरने लग जाये लोग, उपर से कानून की बंदिश। सरकारी आदेश का पालन न करने करने का दंड ,इस जन्म में ही नहीं ,अगले जन्म में भी भोगना पड़ता है। जब राजा लोग होते थे तब वे सोच समझ कर आदेश देते थे। कानून तो उस समय होते नहीं थे। ये कानून तो एक से अधिक लोग राज व्यवस्था में पैदा हुये हैं। कुछ ऐसे कारण सरकार ने पैदा कर दिये हैं। यदि लोग करोना से नहीं मरेगें तो दूसरी बिमारी से मरेगे जो पशुओं व कुत्ते व मुर्गी पाल रखी सै जिन लोगों ने । उनका तो बुरा हाल होगा।यदि घर में त गोबर व कुतों के मल को घर में पड़ा रहने दिया तो कौन -कौन सी बिमारी फैलेगी , सरकार पता है क्या? मुर्गी व मुर्गें तो मर जायेगें, बैगर देख भाल के,उपर से बर्ड फ्लू फैलने का डर।

अब बताये, ऐसी सरकार का क्या करे। जो चारों ओर से मारने के उपाय कर दिये, लोगों की जान बचाते ,बचाते।माने तो नुकसान न माने तो भी नुकसान। अब तो भगवान ही दुनिया को सच्चा सकता है लेकिन उसका बचाना काम होता नहीं।अत: मैं भगवान को मानता नहीं। क्योंकि जब उसने इतना अच्छा काम हाथ में ले रखा है तो समस्या को जड़ से मिटा देता है। इसलिऐ उससे याचना नहीं करनी चाहिए।

जब ब्रम्हा पूछेगा कि तुमने सरकारी कानून की अवहेलना क्यों न की तो जवाब दूंगा।अब दंड मैं नहीं सरकार का मुखिया भोगेगा। कानून उसी ने बनवाये थे।हमारा काम तो पालन करना हैं।

जो यम पूरी का दरबार है वह बिलकुल खाली सा पड़ा। दो चार यम दूत की तरह के खिलाड़ी व देश की सेना में भर्ती होकर यम पदी की तैयारी के लिये बैठे हैं। कुछ कब कब करोना । कबड्डी खेलकर करोना को धमकी दे रहे हैं हम तो पहले ही स्टेडियम में बैठे हैं जहां ,यम का राज चलता हैं। वहां पर रोगों को मौत के घाट उतारा जाता है।

मैं वहां क्यों गया, करीब 10- 15 मिनट तक जोर छोर से चिलाने की आवाजे आ रही थी। जब जाकर देखा तो कुछ मन चले बच्चे थे। वहां खेल कम चिला ज्यादा रहे थे। उनसे पूछने मन भी नहीं किया।जब कानून को तोड़ा है।

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